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Saturday, March 28, 2009
भगवान् बचाओ !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
कैसे कहू ,किसे बताऊ??????
मीरी नय्या, डूबनेसे कैसे बचाऊ???
मै ही केवट, मेरी हि नय्या|
पार करना, मुझे न आया||
किसे पुकारु? कोई सुनना पाया|
सुन्कर मेरी पुकार,
भगवान् तू भी ना आया?????
Friday, March 27, 2009
शादीशुदा जिन्दगी
करवटे बदल्ना हो।
या बहोमे भरना हो॥
चाहत् कि आँगन् मे।
भर् पूर् मजा लेना हो॥
पती की प्यार।
दिल् मे सजानाहो॥
ढेर् सारी खुशियाँ।
उनपे लुटाना हो॥
बाबुल् को याद्
करना
हो।
माँ के लाढ् को तरस्नाहो॥
छोटि छोटि लडायी
करना
हो।
रूट्ना या मनाना हो॥
अपनी बात् मनवाना हो।
कभी उन की भी सुनना हो!!!!!!
शादी ऐसी बन्धन् है।
जिसमे फूलोंके साथ् कान्टे है॥
खुशियों कि दामन् मे।
छुभन् का दर्द् भी है॥
ये हुम् पे है।
के हुम् क्या देते और् लेते है॥
यही
शादीशुदा
जिन्दगी है!!!!!!
मेरी चाहत
जिंदगी की भवर् मे डूबती गयी।
बच्पन् की चाहत् भूलसी गयी॥
कुछ् करने का था मन् मे अर्मान।
अलग् सा काम् करके बन्नाथा महान॥
सबका सर् ऊन्चा करके बढानाथा शान।
क्यो सब् चाहते, करदी कुरबान॥
समय् आगया शायद्!! इसीलिये मैने लिया है ठान।
जरूर् बढाऊगी अपनी आन् बान् और् शान॥
मेरे हमसफ़र् ,मेरे जीवन्
प्यार् की मोह् मे उलझ् ती गयी,
सुल्झाने की चाह् मुझे नही.
क्यो की...
ये प्यार् की धागेसे
चन्दन् सी महकती, माला पिरोती.
कभी सवारती, कभी सजाती.
मुझे तुम् से, तुमे मुझ् से
बाँद्ती गयी!!!!!!!!!!!
पल् पल् ये जीवन्, तेरे ही करन्
ऐ मेरे हमसफ़र्,
मेरे प्यार्, मेरे जीवन्
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