Friday, March 27, 2009

शादीशुदा जिन्दगी

करवटे बदल्ना हो।
या बहोमे भरना हो॥ 
चाहत् कि आँगन् मे।
भर् पूर् मजा लेना हो॥

पती की प्यार। 
दिल् मे सजानाहो॥ 
ढेर् सारी खुशियाँ।
उनपे लुटाना हो॥

बाबुल् को याद् करना हो।
माँ के लाढ् को तरस्नाहो॥

छोटि छोटि लडायी करनाहो।
रूट्ना या मनाना हो॥ 
अपनी बात् मनवाना हो। 
कभी उन की भी सुनना हो!!!!!!

शादी ऐसी बन्धन् है।
जिसमे फूलोंके साथ् कान्टे है॥
खुशियों कि दामन् मे।
छुभन् का दर्द् भी है॥
 
ये हुम् पे है। 
के हुम् क्या देते और् लेते है॥
यही शादीशुदा जिन्दगी है!!!!!!

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