Friday, March 27, 2009

मेरे हमसफ़र् ,मेरे जीवन्

प्यार् की मोह् मे उलझ् ती गयी,
सुल्झाने की चाह् मुझे नही.

क्यो की...
ये प्यार् की धागेसे
चन्दन् सी महकती, माला पिरोती.
कभी सवारती, कभी सजाती.
मुझे तुम् से, तुमे मुझ् से
बाँद्ती गयी!!!!!!!!!!!

पल् पल् ये जीवन्, तेरे ही करन्
ऐ मेरे हमसफ़र्,
मेरे प्यार्, मेरे जीवन्

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