Friday, March 27, 2009

मेरी चाहत

जिंदगी की भवर् मे डूबती गयी।
बच्पन् की चाहत् भूलसी गयी॥
कुछ् करने का था मन् मे अर्मान।
अलग् सा काम् करके बन्नाथा महान॥
सबका सर् ऊन्चा करके बढानाथा शान।
क्यो सब् चाहते, करदी कुरबान॥ 
समय् आगया शायद्!! इसीलिये मैने लिया है ठान।
जरूर् बढाऊगी अपनी आन् बान् और् शान॥

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